Ajay Gogavale – Vighnaharta Lyrics

Ajay Gogavale – Vighnaharta Lyrics
Vighnaharta
Ajay Gogavale
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    Vighnaharta Album Art
    "Vighnaharta." - Ajay Gogavale

    Album: Salman Khan Birthday Special
    Track No: 14
    वक्रतुंड महाकाय
    सूर्यकोटि समप्रभ
    निर्विघ्नम् कुरुमे देव
    सर्व कार्येषु सर्वदा
    गणपति बप्पा मोर्या
    तेरा करम मेरा भरम
    मेरा धरम तू ही तू
    जनम वनम कुछ भी नहीं
    परम तू ही तू
    सितम विटम दया क्षमा
    अजब तेरी अदा है
    जगत तू ही भगत तू ही
    Dev tu hi tu
    हो तू ही दाता तू ही विधाता
    तेरा ये जग तू जग सारा
    तू ही आँधी तू ही तूफ़ान
    तू ही मौजें तू ही किनारा
    तू सुख करता तू ही दुख हरता
    तू ना होता मैं जाने क्या करता
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    गणपति बप्पा मोर्या
    जब जब दुनिया ने हाथ नहीं थामा
    मेरा सफर देवा तेरे द्वार आया
    धूप नहीं है मेरी चाव नहीं मेरी
    सब कुछ है तेरा बप्पा मोरया
    राहें भी तेरी पनाहें भी तेरी
    इन आहों को मेरी बस तेरा सहारा
    है सुख कर्ता तू ही दुख हर्ता
    तू ना होता मैं जाने क्या करता
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    विघ्नहर्ता तू मेरा विघ्नहर्ता रे
    तेरा करम मेरा भरम
    मेरा धरम तू ही तू
    जनम वनम कुछ भी नहीं
    परम तू ही तू
    सितम विटम दया क्षमा
    अजब तेरी अदा है
    जगत तू ही भगत तू ही
    Dev tu hi tu
    सुख कर्ता दुख हर्ता वर्ता विघ्नाची
    नूरवी पूरवी प्रेम कृपया जाची
    सर्वांगी सुंदर उतिषेन्दु रची
    कण्ठी झलके माड मुक्ता पढांची
    जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति
    दर्शन मरते मन कामना पूर्ति
    जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति
    स्वर्णे मरते मन कामना पूर्ति
    Jai dev jai dev jai dev
    Jai dev jai dev jai dev
    Jai dev jai dev
    तू सुख करता है तू ही दुख हर्ता
    तू ही ना होता मैं जाने क्या करता रे
    तू सुख करता है दुख हरता है
    तू ही ना होता मैं जाने क्या करता रे
    विघ्नेश तू मेरा श्री गणेश तू
    विघ्नेश तू मेरा श्री गणेश तू
    विघ्नेश तू मेरा श्री गणेश तू
    जग जग में बसता है एहसास तेरा
    तेरा नामा आए मैं जब सांस लूँ
    मेरी ज़िंदगी के समंदर का चक्का
    मुझ में उभरता है श्री गणेश तू
    मुझ में उभरता है श्री गणेश तू
    मुझ में उभरता है श्री गणेश तू

    Writer(s): Hitesh Modak.

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